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पृथ्वी पर आज भी प्रभाव है महाभारत के इन 3 श्रापों का – आप भी जानिए इन 3 श्रापों के बारे में!

चलिए जानते है उन तीन श्राप के बारे में जिनका प्रभाव आज को पृथ्वी पर है!

आप सभी जानते है सतयुग में ऐसे ऐसे ऋषि मुनी हुआ करते थे जिनका कहा कभी नही टलता था हमारी पौराणिक कथाओं में कुछ ऐसे श्रापों का वर्णन है जिनका प्रभाव आज भी पृथ्वी पर मौजूद है आज हम आपको उन्ही तीन श्रापों के बारे में बतायेंगे

हमारे हिन्दू धर्म के पुराने ग्रंथो में कई सारे श्रापों का वर्णन मिलता है जिनमे हर श्राप के पीछे कोई न कोई कारण छिपा हुआ है जबकि कई श्रापों के पीछे संसार की भलाई छुपी है आज हम आपको ऐसे तीन श्रापों के बारे में बताने जा रहे है जिनका इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा लेकिन जिनका प्रभाव आज भी पृथ्वी पर देखा जा सकता है

#3. ऋषि सृंगी का परीक्षित को दिया श्राप

महाभारत के बाद पांचो पांडव ने अपना राजपाठ त्यागकर स्वर्ग लोक की यात्रा की और प्रस्थान किया तब उन्होंने राजपाठ को संभालने की जिम्मेदारी अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को दे दी एक दिन परीक्षित वन में क्रीडा करने के लिए गये वहां पर उनकी नजर शमीक नामक ऋषि को साधना करते हुए पड़ी और उनकी साधना को भंग को करने के लिए परीक्षित ने उन ऋषि के गले में सांप डाल दिया।

यह सब देखकर शमीक के पुत्र सृंगी ऋषि को इतना क्रोध आया की उन्होंने परीक्षित को श्राप दिया की आज के सात दिन बाद तक्षक नाग के डसने से परीक्षित मृत्यु हो जाएगी और साथ दिनों के बाद ठीक ऐसा ही हुआ परीक्षित को वरदान था की जब वे जीवित है तब तक कलयुग पृथ्वी पर हावी नही हो सकेगा लेकिन उनकी मृत्यु के पश्चात ही कलयुग पृथ्वी पर हावी हो गया

#2. उर्वशी का अर्जुन को दिया हुआ श्राप

महाभारत में विजय प्राप्त करने के लिए दिव्यास्त्र की जरूरत थी जिसे पाने के लिए अर्जुन स्वर्ग लोग पहुँचते है वहां पर उर्वशी नाम की एक अप्सरा उन पर मोहित हो जाती है और उनसे विवाह करने की इच्छा प्रकट करती है जिस पर अर्जुन ने उन्हें अपनी माँ के समान बताया जिससे वे अत्यधिक क्रोधित हो जाती है।

और अर्जुन को 1 वर्ष तक किन्नर होने का श्राप दे देती है लेकिन यह श्राप अर्जुन के लिए अच्छा साबित होता है क्योंकि इसी कारण अर्जुन एक वर्ष के अज्ञात वास में कौरवों से छिपे रहे जिस कारण से उन्हें महाभारत में विजय प्राप्त हुई

#1. युधिष्ठिर द्वारा महिलाओं को दिया गया श्राप

कहा जाता है की जब महाभारत का युद्ध हो समाप्त गया तब माता कुंती पांड्वो को एक रहस्य की बात बताती है की कर्ण उनका भाई था जिससे पांडव बहुत दुखी हो जाते है

युधिष्ठिर ने विधि-विधान पूर्वक कर्ण का अंतिम संस्कार किया उसके बाद उन्होंने समस्त महिला जाती को यह श्राप दिया की स्त्रिया कभी भी कोई बात लम्बे समय तक अपने भीतर नही छिपा पाएंगी जिसके कारण कोई भी स्त्रियां अपने भीतर कोई भी बात लम्बे समय तक नही छुपा पाती

तो दोस्तों ये थी हमारी आज की पोस्ट जिसमे हमने आपको महाभारत के उन तीन श्राप के बारे में बताया जिनका प्रभाव आज भी पृथ्वी पर है हमे उम्मीद है की आपको हमारी पोस्ट पसंद आयी होगी जिसे आप अपने दोस्तों के साथ शेयर कर सकते है 

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